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Destinations
1. Shree Kedarnath
2. Shree Badrinath
3. Shree Gangotri
4. Shree Yamunotri
5. Shree Haridwar
6. Shree Rishikesh
7. Shri Triyogi Narayan Mandir
Fares
Sleeper : 19,500.00
AC2 : 33,500.00
AC3 : 29,500.00
Yatra Dates
| April : 18/Apr/2026 – 02/May/2026 | |
| May : 01/May/2026 – 15/May/2026 | |
| May : 04/May/2026 – 18/May/2026 | |
| May : 07/May/2026 – 21/May/2026 | |
| May : 11/May/2026 – 25/May/2026 | |
| May : 14/May/2026 – 28/May/2026 | |
| May : 18/May/2026 – 01/Jun/2026 | |
| May : 21/May/2026 – 04/Jun/2026 | |
| May : 25/May/2026 – 08/Jun/2026 | |
| May : 28/May/2026 – 11/Jun/2026 | |
| June : 01/Jun/2026 – 15/Jun/2026 | |
| June : 04/Jun/2026 – 18/Jun/2026 | |
| June : 15/Jun/2026 – 29/Jun/2026 |
18/Apr/2026 :हमारी ट्रेन नं.-18477 उत्कल एक्सप्रेस- रायगढ़, खरसिया, सक्ती, चाम्पा, बिलासपुर, अनुपपुर, शहडोल , कटनी मुरवारा, सागोर, बीना मालखेडी होते हुए हरिद्वार के लिए प्रस्थान करेंगे l आप सभी भक्तजन अपने स्टेशन से ट्रेन में अपने बर्थ पर (जो समिति द्वारा दी गई बर्थ नंबर पर) बैठ जायेंगे। बैठने के बाद मैनेजर आपको, आपके बर्थ पर ही मिलने आयेंगे (सभी भक्तजन से मैनेजर को मिलने में कम से कम दो घंटे लग सकते हैं। आप सभी भक्तजनों को 3 बोतल पानी दिया जावेगा। जिसे आपको दोपहर के भोजन, रात के भोजन व अगले दिन सुबह नाश्ते में प्रयोग करना होगा। या नाश्ता ,खाने के पानी को एक साथ 3 न देकर एक एक कर के दिया जा सकता है। जो हरिद्वार तक के लिए रहेगा। सभी भक्तजनों के लिए स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था उमरिया पहुँचने के बाद रहेगी। तत्पष्चात् कटनी से बैठने वाले भक्तजनों का रात्रि भोजन अपनी स्वयं की रहेगी व रात्रि विश्राम ट्रेन पर करेंगे। नोटः- ट्रेन नंबर 18477 उत्तकल एक्सप्रेस ट्रेन लेट होती ही है। तो समिति अपने हिसाब से भोजन, नाश्ता पानी की व्यवस्था करेगी। जिसमें आपको भोजन, नाश्ता पानी में विलंब हो सकती है। समिति यात्रियों के सुविधाओं को देकर उत्तम स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था कराती है।
19/Apr/2026 :सुबह चाय व उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता की व्यवस्था ट्रेन पर की गयी है। ट्रेन नंबर 18477- UTKAL EXP./ 12409 GONDWANA SF EXP / 12823 CG SMPRK KRANTI ट्रेन में बैठने वाले भक्तजन को आगरा केंट निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन में ट्रैन चेंज करनी होगी , तत्पश्चात् निजामुद्दीन (13.23) (01.23), बजे रेल्वे स्टेशन से ट्रेन नं.- 18477 उत्कल एक्सप्रेस में बैठकर निजामुद्दीन से हरिद्वार तक जाना रहेगा। या सुविधा अनुसार निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास 12 पुल्लाह फ्लाईओवर के नीचे बस लगी रहेगी। जो हरिद्वार तक लेकर जावेगी। यहाँ सुविधा सिर्फ उन यात्रियों के लिए है जिनका निजामुद्दीन से हरिद्वार तक की टिकट नही बनी है। उनकी सुविधा के लिए बस की व्यवस्था की गई है। समिति यात्रियों के हिसाब से ही बस लगाती है। कृपया जिन यात्रियों का टिकट ट्रेन में बनी है। वे यात्री निजामुद्दीन से हरिद्वार ट्रेन में जायेंगे। उत्कल एक्सप्रेस में बैठे हुए अन्य भक्तजनों का मथुरा पहुँचने के बाद दोपहर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई है। अन्य ट्रेनों से आये भक्तजनों दोपहर की भोजन की व्यवस्था स्वयं की व्यय से रहेगी। हरिद्वार पहुँचने के पश्चात् सभी भक्तजन अपने-अपने मैनेजर के साथ हरिद्वार स्टेशन से बाहर निकलेंगे व समिति द्वारा की गई व्यवस्थित वाहनों से नीलकंठ ट्रस्ट धाम या सिमिलर होटल/ लॉज/धर्मशाला को जायेंगे। जिसकी दूरी 3 से 4 कि.मी की है। बस में सुविधानुसार जिन भक्तजनों की ठहरने की व्यवस्था जिन होटल, लॉज, आश्रम में की गई है। उसी बस में बैठेंगे। अपने मैनेजर से ट्रेन पर ही होटल, लॉज, आश्रम, का पता कर लेंगे। यदि कोई भक्तजन दूसरे होटल, लॉज या आश्रम वाले बस में बैठते है। तो वह अपने होटल, लॉज व आश्रम अपने व्यय से अपनी सुविधानुसार जावेंगे। असुविधा से बचने के लिए अपने मैनेजर के निर्देशानुसार बस में बैठे। जहाँ नीलकंठ ट्रस्ट धाम या सिमिलर होटल/ लॉज/धर्मशाला पर स्वादिष्ट भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था की गई। स्लीपर वालों के लिए 2 बेड पर 3 श्रद्धालु व 3 बेड पर 4 श्रद्धालु व 4 बेड पर 5 श्रद्धालु व 5 बेड पर 6 श्रद्धालु की व्यवस्था की गई है। ए.सी. वाले भक्तजन के लिए ए.सी. रुम की व्यवस्था की गई है। ए.सी. वालों के लिए 2 बेड पर 2 श्रद्धालु व 3 बेड पर 3 श्रद्धालु व 4 बेड पर 4 श्रद्धालु की व्यवस्था कि गइ है। जो ए.सी रूम हरिद्वार में ही केवल रहेगी। नोटः- ए.सी वाले सभी भक्तजनों की रूम की सुविधा हरिद्वार में ए.सी की रहेगी आगे की यात्रा पहाड़ों में छोटे -छोटे गांव में व्यवस्था रहती है। जिसके कारण होटल /लॉज /धर्मशाला में रूम साधारण एवं सामान्य रहेगी। और सिल्वर वाले सभी भक्तजन की रूम की व्यवस्था एक समान रहेगी। जिसमें स्लीपर वाले यात्री 1 जोड़ी पति पत्नी के साथ एक जोड़ी पति पत्नी 4 बेड के रूम में रहेंगे।
20/Apr/2026 :महिलाये पीला रंग की बॉर्डर वाली साड़ी या सूट गजरे के साथ पहनेंगी। पुरुष पीला रंग की शर्ट और धोती या कुरता पजामा पहनेंगे। आप सभी भक्तजन सुबह (08.00) बजे उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता करने के पश्चात् अपने-अपने नॉन ए.सी बस में बैठेंगे जो सीट नंबर समिति द्वारा दी गयी है, ए.सी वाले भक्तजनों के लिए भी नॉन ए.सी बस की व्यवस्था रहती है। आप अपना पूरा समान नाश्ता करने के बाद बस में रखेंगे। मैनेजर के निर्देशानुसार ही बस में बैठेंगे। तब तक आप अपने रूम पर ही आराम करेंगे। आप रूम की चाबी रिसेप्शन में या अपने मैनेजनर को ही देंवे। अन्यथा चाबी जमा नहीं करने पर 500 रू देने होंगे विधि -विधान अनुसार पूजा अर्चना करने के तत्पश्चात् हमारी बस यमुनोत्री के दर्शन के लिए सुबह (08ः00) बजे प्रस्थान करेगी। यात्रा के प्रथम पड़ाव होने के कारण थोड़ी विलम्भ हो सकती है। यात्री अपना धैर्य का परिचय देवें। मैनेजर और समिति का सहयोग करेंगे। हरिद्वार से खरादी की दूरी 203 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 6 से 7 घंटे का समय लग सकता है। सभी भक्तजन अपना चार धाम यात्रा का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व करवा लेवे। दोपहर भोजन की व्यवस्था स्वयं के व्यय से रहेगी। सभी भक्तजनों को खरादी में होटल श्री त्रिपुर गोविंद ,होटल हेमराज, होटल आशीश व सिमिलर में ठहरने की व्यवस्था की गई है। आगे की व्यवस्था सभी भक्तजनों ए़़.़सी़. व स्लीपर वालों के लिए सामान्य हो जावेगी। खरादी पहुँचने के पश्चात् उत्तम स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई है एवं रात्रि विश्राम अपने – अपने रुम पर करेंगे। स्लीपर वालों के लिए 3 बेड पर 4 श्रद्धालु व 4 बेड पर 5 श्रद्धालु 5 बेड पर 6 श्रद्धालु व्यवस्था रहेगी। ए़़.़सी़. वालों के लिए 3 बेड पर 3 श्रद्धालु व 4 बेड पर 4 श्रद्धालु व्यवस्था रहेगी। स्लीपर वाले भक्तजनों की व्यवस्था 4 बेड वाले रूम में एक दूसरे फैमिली के साथ रहेगी। 4 बेड पर दो कपल साथ-साथ रहेंगे। और कल सुबह के लिए एक छोटी से थैला बना लेंगे जिसमें एक षॉल, रेनकोट, छाता, लेकर अवश्य जावे क्योंकि पहाड़ो पर मौसम परिवर्तन कभी भी हो जाती है। सभी यात्रीगण बरसाती जूता पहनकर ही यात्रा में जाएंगे। क्योंकि यमुनोत्री की चढ़ाई बिना जूते के बहुत ही कठानाई हो जाती है। यमुनोत्रीः- यह मंदिर हिमालय क्षेत्र के पश्चिमी भाग में स्थित है। इस मंदिर को माता यमुनोत्री का मंदिर के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ,माता यमुना सूर्य देव की पुत्री है। और धर्मराज यमराज की छोटी बहन। इस मंदिर में मृत्यु के देवता यम अपनी छोटी बहन यमुना के साथ विराजमान है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व है माना जाता है कि जो श्रद्धालु चार धाम की यात्रा कर लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता के अनुसार, इन्हीं चारों धामों में से एक धाम यमुनोत्री मंदिर भी है। यमुनोत्री मंदिर में यमुना नदी का उद्वम् हुआ है। बताया जाता है कि इसके पास ही दो पवित्र कुंड भी है, जिसे सूर्य कुंड और गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है। यमुनोत्री मंदिर के कपाट हर साल अक्षय तृतीया के दिन खुलते है और दीपावली के दुसरे दिन बंद कर दिया जाता है।
21/Apr/2026 :महिलाये गुलाबी रंग की साड़ी या सूट साथ ही गुलाबी बिंदी,चूड़ी पहनेंगी। पुरुष गुलाबी रंग की शर्ट या कुरता और सफेद या अपने स्वेक्छानुसार रंग का पेंट या पजामा पहनेंगे। सभी भक्तजन नित्यक्रर्म होटल में ही कर लेवें जिन यात्रियों को स्नान करना है। वे यमुनेत्री धाम में तप्त कुण्ड में स्नान कर तप्त कुण्ड में स्नान पररानिक महत्व बहुत है। सुबह चाय की व्यवस्था व नाश्ता पैकट आपको दी जायेगी। हमारी बससुबह 05 बजे माँ यमुनोत्री दर्शन के लिए प्रस्थान करेगी। खरादी से यमुनोत्री की दूरी 23 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 1 से 01ः30 घंटे का समय लग सकता है। आप अपना सामान रुम पर ही रखकर दर्शन को जाएंगे। आप सभी को हमारी बस जानकी जट्टी/खरसाली/शिवशक्ति/पर्किंग में छोड़ेगी । बस से उतरने से पूर्व बस ड्रईवर या किसी लोकल श्रद्धालु से बस पर्किंग का नाम पूछ लेंगे। ताकि शाम को वापस आने में असानी हो यदि जाम की वजह से बीज रोड या पार्किंग के पहले ही बस से उतरते है। तो दर्शन करके वापस जानकी जट्टी बस पार्किंग या खरसाली (बड़ा हरा रंग पुल ) वहाँ आकर अपने बस ड्राईवर मैनेजर व वेटर से कॉल करके पूछ ले की बस कहा पर खड़ी है। और कहाँ आना है। तत्पश्चात् आपको अपनी व्यवस्थानुसार मंदिर के लिए 06 कि.मी. पैदल चलना रहेगा। जिसमें आप चाहे तो घोड़ा, खच्चर या पालकी की सुविधा ले सकते हैं। जिसकी व्यय(खर्च) आपको स्वयं करनी रहेगी। आप बस स्टैण्ड उतरते ही घोडे, खच्चऱ, पालकी वाले आप के पास आ जाते है। आप उनसे धन राशि तय कर अपनी व्यवस्था कर सकते है, यात्री समय का विशेश ध्यान दे ,यदि बस स्टेण्ड के पास घोड़ा, खच्चर या पालकी मिलने में परेशानी आती है। तो आप यमुनोत्री की चढ़ाई चालू कर दे। चढ़ाई करने के रोड पर ही पुलिस चौकी के पास सरकारी घोड़ा, खच्चर ,पालकी का स्टैण्ड है। ध्यान देंगे घोड़ा, खच्चर ,पालकी बुक करते समय उन्हें बस पार्किंग तक वापसी में छोड़ने को कहेंगे। जिससे आपको बस खोजने में असानी हो। यदि कोई परेशानी आती है, तो आप अपने मैनेजर का सहयोग ले सकते हैं। वापसी शाम 05 बजे तक आप उसी जगह जानकी जट्टी/खरसाली/शिवशक्ति/बस स्टैंड आएंगे। जहाँ आप बस से उतरे थे। हमारी बस शाम 05ः30 बजे खरादी के लिए निकल जावेगी। जो भक्तजन माँ यमुनोत्री के दर्शन कर पहले बस स्टैंड आ जाएगें। वह किसी भी बस में समायोजित कर खरादी के लिए प्रस्थान करेंगे। जहाँ जाकर आराम व रात्रि विश्राम करेंगे। यदि आपको बस खोजने में समस्या आ रही होगी। तो आप अपने मैनेजर को फोन कर संपर्क कर लेंगे। या सूचना केंद्र पहुँचकर माइक से मैनेजर या ड्राइवर का नाम एनाउंस करेगें। उसके उपरांत आप अपने विश्राम स्थान खरादी होटल श्री त्रिपुर गोविंद , होटल हेमराज, होटल आशीश या सिलिमर होटल/लॉज में रूकेंगे।
22/Apr/2026 :ाक्तजन सुबह (09ः00) बजे उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता कर अपना-अपना समान बस पर ही रखेंगे। मैनेजर के निर्देशानुसार ही बस में बैठेंगे । खरादी से उत्तरकांशी की दूरी 90 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है। तब तक आप अपने रूम पर ही आराम करेंगे। हमारी बस 9 बजे तक माँ गंगोत्री के लिए प्रस्थान करेगी। आप रूम की चाबी रिसेप्शन में या अपने मैनेजनर को ही देंवे। अन्यथा चाबी जमा नहीं करने पर 500 रू देने होंगे। व समिति द्वारा की गई व्यवस्थित वाहन बस से होटल श्री त्रिपुर अमन पैलेस,होटल उत्सव, होटल कुंजापूरी, होटल राजगृह या सिलिमर होटल/लॉज को जाएंगे। रात्रि उत्तम लाजवाब स्वादिष्ट भोजन व विश्राम की व्यवस्था बरेथी उत्तरकांशी पहुँचने के बाद रहेगी। स्लीपर वालों के लिए 2 बेड पर में 3 श्रद्धालु व 3 बेड पर 4 श्रद्धालु व 4 बेड पर 5 श्रद्धालु व 5 बेड पर 6 श्रद्धालु की व्यवस्था रहेगी। ए़़.़सी़. वालों के लिए 3 बेड पर 3 श्रद्धालु व 4 बेड पर 4 श्रद्धालुयों की व्यवस्था की गई है। नोटः- 1. ए.सी वाले सभी भक्तजनों की रूम की सुविधा हरिद्वार में ए.सी की रहेगी आगे की यात्रा पहाड़ों में छोटे -छोटे गांव में व्यवस्था रहती है। जिसके कारण होटल/लॉज/धर्मशाला में रूम नॉन ए.सी साधारण एवं सामान्य रहेगी। और स्लीपर वाले सभी भक्तजन व ए.सी वाले भक्तजनों की रूम की व्यवस्था एक समान रहेगी। जिसमें स्लीपर वाले यात्री एक जोड़ी पति पत्नी के साथ दूसरे जोड़ी पति पत्नी 4 बेड के रूम में रहेंगे। 2. सभी रात्रि भोजन करने के पश्चात् अपने-अपने कमरे पर ही विश्राम करेंगे। और कल सुबह के लिए एक छोटी से थैला बना लेंगे जिसमें एक षॉल, रेनकोट, छाता, लेकर अवश्य जावे क्योंकि पहाड़ो पर मौसम परिवर्तन कभी भी हो जाती है। सभी यात्रीगण जूता पहनकर ही यात्रा में जाएंगे। गंगोत्रीः- हिमालय के भीतरी क्षेत्र में गंगोत्री धाम सबसे पवित्र तीर्थ स्थान है जहाँ गंगा, जीवन की धारा पहली बार पृथ्वी को स्पर्श करती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार,देवी गंगा ने कई शताब्दियों की अपनी गंभीर तपस्या के बाद राजा भागिरथ के पूर्वजों के पापोंको मिटाने के लिए एक नदी का रूप लिया था। भगवान शिव ने माँ गंगा के गिरने के अपार प्रभाव को कम करने के लिए अपने उलझे हुए बालो में माँ गंगा को प्राप्त किया। वह अपने पौराणिक स्त्रोत पर भागीरथी कहलाने लगी।
23/Apr/2026 :महिलाये सफेद या क्रीम रंग की बॉर्डर वाली साड़ी या सूट गजरे के साथ पहनेंगी। पुरुष सफेद या क्रीम रंग की शर्ट और धोती या कुरता पजामा पहनेंगे। सभी भक्तजन सुबह 07 बजे चाय,नाश्ता करके सामान रूम पर छोड़कर माँ गंगोत्री दर्शन के लिए जायेंगे। उत्तरकांशी से गंगोत्री की दूरी 99 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है। जिन भक्तजनों को माँ गंगोत्री के पवित्र जल में स्नान करना होगा। वे भक्तजन अपने साथ एक थैले में एक जोडी कपड़ा अवश्य रख लेवें । वह गंगोत्री का पवित्र संकल्पिक गंगाजल जल एक जार (डिब्बे) में अवश्य ले लेवें। जिन्हें आपको रामेश्वरम् धाम में शिवजी पर अर्पित करना अनिवार्य है। तभी आपकी गंगोत्री माँ की दर्शन सफल होगी । रात्रि उत्तम लाजवाब स्वादिष्ट भोजन व विश्राम की व्यवस्था श्री त्रिपुर अमन पैलेस ,होटल उत्सव, , होटल कुजापूरी, होटल राजगृह या सिलिमर होटल/लॉज बरेथी उत्तरकांशी में की गई है।
24/Apr/2026 :सुबह 06 बजे् चाय, नाश्ता करने पश्चात् सभी सामान के साथ बस में सभी भक्तजन बैठेंगे। हम पुनः बाबा केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन को जाएंगे। उत्तरकांशी से रामपुर की दूरी 310 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 8 से 9 घंटे का समय लग सकता है। मैनेजर के निर्देशानुसार ही बस में बैंठेंगे। तब तक आप अपने रूम पर ही आराम करेंगे। आप रूम की चाबी रिसेप्शन में या अपने मैनेजर को ही देंवे। अन्यथा चाबी जमा नहीं करने पर 500 रू देने होंगे। रात्रि उत्तम स्वादिष्ट भोजन व विश्राम की व्यवस्था रामपुर में की गई है। जहाँ आपको ठहरनें के लिए होटल श्री त्रिपुर (मंदाकिनी), होटल श्री त्रिपुर (गौरीकुंड), होटल श्री त्रिपुर (न्यू स्टार) या सिमिलर होटल में की गई है। स्लीपर वालो के लिए 2 बेड पर 3 श्रद्धालु व 3 बेड पर 4 श्रद्धालु, 4 बेड पर 5 श्रद्धालु, 5 बेड पर 6 श्रद्धालु की व्यवस्था रहेगी। ए़़.़सी़. वाले यात्रियों के लिए 3 बेड पर 3 श्रद्धालु, 4 बेड पर 4 श्रद्धालु की व्यवस्था की गई है। होटल श्री त्रिपुर (गौरीकुंड) के लिए आपको 100 मीटर की चढ़ाई करनी होगी। नोट :- 1. सभी यात्रीगण कल केदारनाथ की चढाई के लिए रेनकोट/छाता, दवाईयां व परसे, गरम कपड़ा एक छोटे थैले में रख लेवें क्योंकि केदारनाथ पर्वत पर कभी भी बारिश होने की संभावना रहती है। सभी भक्तजन बरसाती जूता पहनकर जाएंगे। केदारनाथ पर्वत पर अत्यधिक ठंड़ रहती हैं। अपना समान रूम पर ही छोड़कर अगले दिन केदारनाथ दर्शन को जावेगें। 2. ए.सी वाले सभी भक्तजनों की रूम की सुविधा हरिद्वार में ए.सी की रहेगी आगे की यात्रा पहाड़ों में छोटे -छोटे गांव में व्यवस्था रहती है। जिसके कारण होटल/लॉज/धर्मशाला में रूम नॉन ए.सी साधारण एवं सामान्य रहेगी। और स्लीपर वाले सभी भक्तजन व ए.सी वाले भक्तजनों की रूम की व्यवस्था एक समान रहेगी। जिसमें स्लीपर वाले यात्री एक जोड़ी पति पत्नी के साथ दूसरे जोड़ी पति पत्नी 4 बेड के रूम में रहेंगे। केदारनाथः-मंदिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्व मंदिर है। पत्थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। केदारनाथ मंदिर तीन तरफ पहाड़ो से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फुट उंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट उंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट उंचा भरतकुंड केदारनाथ मंदिर न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांच नदियों का संगम भी यहाँ मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी है।
25/Apr/2026 :महिलाये भगवा रंग की साड़ी या सूट साथ ही संतरा बिंदी, चूड़ी पहनेंगी। पुरुष भगवा रंग की शर्ट या कुरता और सफेद या अपने स्वेक्छानुसार रंग का पेंट या पजामा ,बोल बम वाला पहनेंगे। सुबह 4 बजे हम बाबा केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेगें। हमारी बस सीतापुर बस स्टैण्ड तक ले जावेंगी। वहाँ से 02 कि.मी. सोनप्रयाग बस स्टैण्ड टैक्सी/पैदल अपनी सुविधानुसार स्वयं के व्यय से जाना रहेगा। सोनप्रयाग से पूल पार करते ही टैक्सी लगभग 50 रू़ प्रति यात्री आपको गौरीकुंण्ड तक ले जावेगी। आप टैक्सी स्टैण्ड उतरने के पश्चात् घोड़े, खच्चर, पालकी वाले आप के पास आ जाते है। आप उनसे धनराशि तय कर अपनी व्यवस्था कर सकते है, यदि आपको घोड़े, खच्चर, पालकी में कोई परेशानी आती है। तो आप अपने मैनेजर का सहयोग ले सकते हैं। वहाँ से सभी भक्तजन घोडे, खच्चर के मालिक से किराया तय कर या काउंटर से रजिस्ट्रेशन कराकर बाबा केदारनाथ के दर्शन को जाएंगे। गौरीकुंण्ड से केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की दूरी 22 कि.मी. की चढ़ाई रहती है। जिसकी व्यय आपकी स्वयं की रहेगी। अपने-अपने बस वालों और मैनेजर का नम्बर ले लेंगे। आप सभी भक्तजन से निवेदन है, कि बाबा केदारनाथ के दर्शन कर रात्रि 09 बजे तक वापस आ जाएंगे। गौरीकुंण्ड से सोनप्रयाग तक आपको टैक्सी से स्वयं के व्यय से आना रहेगा। टैक्सी लगभग 50 रू़ प्रति श्रद्धालु आपको सोनप्रयाग टैक्सी स्टेंड तक ले जावेगी। आप सोनप्रयाग या सीतापुर में टैक्सी वाले से राशि तय कर अपनी व्यवस्था अनुसार रामपुर मंदाकिनी होटल, न्यू स्टार तक आ जावे। यदि आप किसी करणवश वापसी आने मैं असमर्थ रहते है। तो उसकी जानकारी आप अपने मोबाइल फोन या किसी यात्री के फोन से अपने मैनेजर या समिति के हेड क्वार्टर में दे देंगे। यदि कोई भक्तजन केदारनाथ भोलेबाबा जी का दर्शन कर जल्द वापस आ जाता है, तो वह रामपुर विश्राम स्थल पहुँच सकते है। कोई भी भक्तजन रात्रि विश्राम केदारनाथ पर्वत पर नहीं करेगें, क्योंकि वहाँ पर ऑक्सीजन की कमी रहती है व काफी ज्यादा ठंड रहती हे। परन्तु यदि किसी कारण वश भक्तजनों को आने में लेट होने से रात्रि विश्राम केदारनाथ पर्वत पर करना पड़े, तो पहले टेन्ट या होटल की व्यवस्था स्वयं के व्यय से कर लेवें, क्योंकि केदारनाथ पर्वत पर ठहरने की व्यवस्थायें काफी कम हो गई है व होटल, धर्मशाला व टेन्ट शाम 05 बजे तक पुरी बुक हो जाती हैं। आप यदि रात्रि विश्राम केदारनाथ पर्वत पर करने के बाद, सुबह 04 बजे केदारनाथ से घोडे, खच्चर की सुविधा लेकर आप अपनी रामपुर सुबह 09 बजे तक अपनी व्यवस्थानुसार पहुँचेंगे। रात्रि भोजन व विश्राम रामपुर में की गई है।
26/Apr/2026 :सुबह चाय, नाश्ता के पश्चात् आप सभी भक्तजन अपनी व्यवस्थानुसार स्वयं के व्यय से बस/ टैक्सी (मैक्स/सुमो) वाले से राशि तय कर श्री त्रियुगी नारायण (माता पार्वती भगवान भोलेनाथ जी का विवाह स्थान) के दर्शन के लिए जावेंगे। दोपहर भोजन की व्यवस्था स्वयं की रहेगी। रात्रि भोजन व विश्राम रामपुर होटल में की गई है। अगले दिन सुबह 6 बजे चोपता (तुंगनाथ महादेव) के दर्शन के लिए तैयार रहेंगे। रात्रि भोजन व विश्राम पीपलकोटी में की गई है।
27/Apr/2026 :सुबह चाय नाश्ता कर सभी भक्तजन बस में अपना-अपना समान सुबह 06 बजे तक रखेंगे। मैनेजर के निर्देशानुसार ही बस में बैठेंगे। आप रूम की चाबी रिसेप्शन में या अपने मैनेजर को ही देंवे। अन्यथा चाबी जमा नहीं करने पर 500 रू देने होंगे। तत्पश्चात् रामपुर से चोपता (तुंगनाथ महादेव) के लिए सुबह 6 बजे प्रस्थान करेंगे। रामपुर से चोपता 70 कि. मी है। चोपता से तुंगनाथ महादेव की दूरी 3 कि. मी आपको पैदल चलना रहेगा। चोपता से पीपलकोटी की दूरी 80 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है। पीपलकोटी पहुँचने के पश्चात् रात्रि स्वादिष्ट भोजन व विश्राम की व्यवस्था होटल श्री त्रिपुर (श्री गंगा), होटल श्री त्रिपुर (दीपलोक), होटल श्री त्रिपुर (कुंवर) लॉज रहेगा। स्लीपर वालो के लिए 2 बेड पर में 3 श्रद्धालु व 3 बेड पर 4 श्रद्धालु, 4 बेड पर 5 श्रद्धालु, 5 बेड पर 6 श्रद्धालु व्यवस्था रहेगी। ए़़.़सी़. 3 बेड पर 3 श्रद्धालु 4 बेड पर 4 भक्तजनों नॉन ए.सी की व्यवस्था की गई है। बद्रीनाथः- बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। यह भगवान बद्रीनारायण से संबंधित एक बहुत श्रद्वेय धार्मिक स्थल है जो भगवान बद्रीनाथ को समर्पित है,जो अन्य कोई औैर देवता नहीं भगवान विष्णु ही है। मंदिर समुद्र तल से 3133 मीटर की उंचाई पर स्थित है। बद्रीनाथ धाम छोटा चार धाम भी कहलाता है यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक है, औैर वैष्णतियों का सबसे पवित्र मंदिर है। यह वैष्णव के 108 दिव्य देसम में प्रमुख है। बद्रीनाथ के मंदिर में स्थित मुख्य देवता भगवान बद्रीनाथ 3.3 फीट की शालीग्राम की शिला प्रतिमा है, जो भगवान विष्णु है। और जो भगवान की सबसे शुभ स्वयं प्रकट मूर्तियों में से एक है। बद्रीनाथ की यात्रा का मौसम हर साल छह महीने लंबा होता है, जो अप्रैल से शुरू होता है और नवंबर के महीने में समाप्त होता है। नोटः- 1. हमारी रात्रि विश्राम और भोजन पीपलकोटी होटल में ही व्यवस्था की गई है। अगर किसी कारणवश पीपलकोटी पहुँचने में विलंब हो जाती है। या पुलिस प्रशासन द्वारा गाड़ी को गोचर या कहीं दूसरे स्थान अपने गंतव्य स्थान से दूर किसी दूसरे स्थान पर रोक देती है। इस परिस्थिति में यात्री को स्वयं अपनी व्यवस्थानुसार से भोजन एवं रहने की व्यवस्था करनी पड़ेगी। क्योंकि समिति द्वारा पहले से ही पीपलकोटी में भोजन तथा रहने की व्यवस्था की गई है। 2. ए.सी वाले सभी भक्तजनों की रूम की सुविधा हरिद्वार में ए.सी की रहेगी आगे की यात्रा पहाड़ों में छोटे -छोटे गांव में व्यवस्था रहती है। जिसके कारण होटल/लॉज/धर्मशाला में रूम नॉन ए.सी साधारण एवं सामान्य रहेगी। और स्लीपर वाले सभी भक्तजन व ए.सी वाले भक्तजनों की रूम की व्यवस्था एक समान रहेगी। जिसमें स्लीपर वाले यात्री एक जोड़ी पति पत्नी के साथ दूसरे जोड़ी पति पत्नी 4 बेड के रूम में रहेंगे।
28/Apr/2026 :महिलाये नीला रंग की साड़ी या सूट साथ ही नीला बिंदी,चूड़ी पहनेंगी। पुरुष नीला रंग की शर्ट या कुरता और सफेद या अपने स्वेक्छानुसार रंग का पेंट या पजामा पहनेंगे। सभी भक्तजन नित्यक्रर्म होटल में ही कर लेवें जिन यात्रियों को स्नान करना है वे बद्रीनाथ में तप्त कुण्ड में स्नान कर लेंगे।तप्त कुण्ड में स्नान पैरानिक महत्व बहुत है। हम सुबह 05 बजे बस के द्वारा बद्रीनाथ धाम दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। पीपलकोटी से बद्रीनाथ की दूरी 75 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। अपना समान आप अपने रूम पर ही छोड़कर जावेंगे। बाबा बद्रीनाथ धाम के दर्शन पूजा अर्चना कर वापसी शाम 5 बजे तक आप अपने बस में आकर बैठ जाएंगे। जहाँ आपको हमारी बस छोड़ी थी। हमारी बस बद्रीनाथ बस स्टैण्ड से शाम 05 बजे पीपलकोटी के लिए निकल जावेगी। हमारी उत्तम स्वादिष्ट भोजन व रात्रि विश्राम की व्यवस्था पीपलकोटी में होटल श्री त्रिपुर (श्री गंगा), होटल श्री त्रिपुर (दीपलोक), होटल श्री त्रिपुर (कुंवर) लॉज में रहेगी।
29/Apr/2026 :हम सुबह 07 बजे उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता करने के बाद पीपलकोटी से ऋषिकेश के लिए प्रस्थान करेंगे। पीपलकोटी से ऋशिकेश की दूरी 215 किलोमीटर है। जिसमें लगभग 6 से 7 घंटे का समय लग सकता है। आप अपना सामान बस पर रख के ही बैठेंगे। मैनेजर के निर्देशानुसार ही बस में बैंठेंगे। तब तक आप अपने रूम पर ही आराम करेंगे। आप रूम की चाबी रिसेप्शन में या अपने मैनेजनर को ही देंवे। अन्यथा चाबी जमा नहीं करने पर 500 रू देने होंगे। जिसमें लक्ष्मण झुला, राम झुला आदि का दर्शन करते हुए हरिद्वार में होटल श्री नीलकंठ ट्रस्ट धाम या सिमिलर होटल/ लॉज/धर्मशाला में विश्राम करेंगे। यदि बस जाम में फसती है। तो 6 बजे तक ऋषिकेश में हमारी बस पार्किंग में खड़ी रहेगी। आप अपनी व्यवस्थानुसार ऑटो से दर्शन कर आप सभी वापसी बस पार्किग पर ही आयेगें। जहाँ आपको दर्शन के लिए 2 घंटे का समय दिया जायेगा। जो भक्तजन लेट करते है, वे हरिद्वार होटल श्री नीलकंठ ट्रस्ट धाम या सिमिलर होटल/ लॉज/धर्मशाला अपनी व्यवस्था से पहुँचेगे। अपने मैनेजर से सही होटल, लॉज, आश्रम की सम्पूर्ण जानकारी अवश्य ले लेंवे। अन्यथा दूसरे होटल, लॉज, आश्रम में छोड़ने पर आपको काफी परेशानी हो सकती है। जिसके बाद आप स्वयं से अपने होटल, लॉज, आश्रम पहुँचना रहेगा। जहाँ रात्रि स्वादिष्ट भोजन व विश्राम की व्यवस्था की गई हैं। नोटः- यदि किसी कारणवश जाम लगने से शाम 06ः00 बजे तक ऋशिकेश नही पहुँच पाती है। तो हमारी बस सीधे हरिद्वार के लिए प्रस्थान करेगी। जिनको ऋशिकेश घूमना है। ऋशिकेश से हरीद्वार की दूरी 19 किलोमीटर है। वह अपने मैनेजर को जानकारी दे देंवे। और ऋशिकेश दर्शन कर अपने सुविधानुसार स्वयं से स्वयं की व्यय से हरिद्वार अपने होटल पहुँच जाएंगे।
30/Apr/2026 :सभी भक्तजन सुबह 08 बजे उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता कर किसी आटो वालो से धनराशि तय कर स्वयं के व्यय से पूरे हरिद्वार का दर्शन (माँ गंगा स्नान, मनसा देवी, चण्डी देवी और पतंजलि गायत्री शक्तिपीठ आदि) कर लेगें। वह शाम 06 बजे हर की पौडी पहुँचकर सामने की ओर अपना स्थान बनाकर गंगा माँ की आरती देखकर परम् अखंड़ सौभाग्य प्राप्त होगा। व अपनी सुविधानुसार मार्केटिंग कर अपने विश्राम स्थल पर रात्रि 07 बजे तक पहुँचेगे। रात्रि स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था रहेगी।नोटः- ट्रेन नंबर 18478 ट्रेन लेट होती ही है। तो समिति अपने हिसाब से भोजन, नाश्ता पानी की व्यवस्था करेगी। जिसमें आपको भोजन, नाश्ता पानी में विलंब हो सकती है।
01/May/2026 :सुबह 05 बजे हम होटल श्री नीलकंठ ट्रस्ट धाम या सिमिलर होटल/ लॉज/धर्मशाला से हरिद्वार रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होंगे। हमारी ट्रेन हरिद्वार पुरी उत्कल एक्सप्रेस -ट्रेन नं. -18478 (06.54) बजे में हरिद्वार से बिलासपुर के लिए रवाना हो जावेगी। सभी भक्तजन उत्कल एक्सप्रेस में समिति द्वारा दिये हुये सीट पर ही बैठेंगे। आप अपने मैनेजर से संपर्क कर बर्थ व ट्रेन की सही जानकारी ले लेंगे। यह आप की जवाबदारी रहेगी। यहां ट्रेन में सभी भक्तजनों को 3 पानी बोतल की व्यवस्था की जावेगी, जिसे आप सुबह नाश्ता, दोपहर भोजन एवं रात्री भोजन में उपयोग करेंगें। उसके बाद अगले दिन 1 पानी बोतल की व्यवस्था की गई है। जो सुबह उत्तम स्वादिष्ट नाश्ता में उपयोग करेंगें। उसके उपरांत जिन भक्तजन को पानी की आवश्यकता पड़ती है, तो वह स्वयं के व्यय से उपयोग करेगें। ट्रेन नं.12410 GONDWANA EXPRESS हज़रात निजामुद्दीन (15.05), ट्रेन नं. 12824 CG S KRANTI हज़रात निजामुद्दीन (17.55),में ट्रेन चेंज करने वाले भक्तजन का दोपहर का भोजन की व्यवस्था आपकी स्वयं की व्यय से रहेगा। छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से आने हुए भक्तजनों के लिए केवल ट्रेन टिकट हरिद्वार से हरिद्वार तक की रहेगी। भोजन व नाश्ता,चाय, पानी स्वयं की व्यय से करना रहेगा। नोटः-1. यदि 18478 उत्तकल एक्सप्रेस विलंभ रहेती है। और आपकी हज़रात निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन / गजियाबाद रेलवे स्टेशन में कनेक्टिंग ट्रेन मिलने की सम्भावना कम रहेगी। तो आप स्वयं हरिद्वार बस स्टेण्ड में बस से या अपने मैनेजर से सम्पर्क कर टैक्सी उपलब्ध करवा स्वयं के व्यय से निजामुद्द्ीन रेलवे स्टेशन जा सकते है। या 7440411411 में कॉल करके अपनी टैक्सी बुक करवा सकते है।
02/May/2026 :हमारी ट्रेन लगभग पेंड्रा (08ः27), बालगहना(09ः31), कारगीरोड(9ः46), बिलासपुर(11ः00), अकलतरा (11ः39), जांजगीर नैला (11ः58), चांपा(12ः15), बाराद्वार(12ः33), सक्ती (12ः46), खरसिया(13ः00), रायगढ(13ः30), डोंगरगढ(12ः22), दुर्ग(13ः25), रायपुर(14ः05), भाटापारा(15ः11), पहुँचने की सम़्भावना रहेगी। तत्पश्चात् हमारी सेवायें यही समाप्त हो जावेगी।
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हिन्दू धर्म में चार धाम का विशेष महत्व है | इन चारों धामों को बहुत ही पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है | ऐसी मान्यता है के जो हिन्दू इन चार धाम की यात्रा करता है वह जीवन-मृत्यु के बंधन से छुट जाता है और उसे अंत में मुक्ति प्राप्त होती है | चारों धामों को पवित्र बताया गया है | बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु का पवित्र धाम है | यहाँ इन्हें बद्री विशाल भी कहा जाता है | ऐसी मान्यता है के यहीं भगवान विष्णु ने नर-नारायण रूप में तपस्या की थी | केदारनाथ धाम भगवान शिव की भूमि है और यह पंचकेदारों में से एक है | गंगोत्री व यमुनोत्री धाम पवित्र और जीवनदायिनी गंगा व यमुना नदी के उदगम स्थल हैं | जानें कब से चल रही है चारधाम यात्रा :- अभी हर वर्ष चलने वाली चारधाम यात्रा कब और कैसे शुरू हुई ? चारधाम यात्रा की शुरुआत 8 – 9 वीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा बद्रीनाथ की खोज से बताई जाती है | इससे पहले भी यह एक धार्मिक स्थान था और श्रद्धालु यहाँ आते थे | परन्तु आदिगुरु शंकराचार्य की धर्म प्रसार यात्रा के दौरान बद्रीनाथ और अन्य धामों का बहुत अच्छा रूपांतरण हुआ और हर जगह सुन्दर मंदिरों का निर्माण हुआ | मंदिरों में दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुँचते तो थे पर इनकी संख्या काफी काम थी | भारत की आज़ादी के बाद धार्मिक पर्यटन बढ़ा और श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी | बाद में परिवहन व्यवस्था में सुधार और सुविधाओं में विस्तार से श्रद्धालुओं की संख्या आज लाखों में है |