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Fares
Sleeper : 17,500.00
AC2 : 32,500.00
AC3 : 27,500.00
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1TH DAY : आप सभी भक्तजन बिलासपुर प्रातः (10.00) बजे तक अपनी व्यवस्था अनुसार बिलासपुर रेल्वे स्टेशन पहुचंगे । तत्पश्चात् बिलासपुर रेल्वे स्टेशन प्रातः (11.45) बजे ट्रेन नं.-18234 NARMADA EXP- उज्जैन के लिए प्रस्थान करेंगी। पेण्ड्रा रेल्वे स्टेशन पहुँचने के पश्चात दोपहर भोजन की व्यवस्था कराई गई है | रात्रि भोजन कटनी साउथ पहुँचने के पश्चात व्यवस्था कराई गई है। रात्रि विश्राम ट्रेन पर करेंगे | नोट:- (1) किसी कारणवश आप अपनी ट्रेन छोड़ देते है तो इसके जवाबदर आप सवयं होंगे । आपको 03 पानी बोतल दिया जावेगा। जिसे आपको दोपहर के भोजन व रात के भोजन व अगले दिन सुबह नाश्ते मे प्रयोग करना होगा एवं ओंकारेश्वर तक यह पानी का प्रयोग करना है । पानी खत्म होने पर आपको स्वयं खरीदना होगा । (2) उज्जैन पहुँचने के पहले ट्रेन पे ही यात्रीगण अपने साथ डेली युज सामग्री जैसे ब्रश, मंजन और साबुन, एक जोड़ा वस्त्र पहनन हेतु तथा मोबाइल , कैमरा, पर्स ,पैसा अपने साथ एक बैग रखेंगे क्योकि आपको सामान बस में रखने के के बाद बार-बार चढाना उतारना नही पडेगा। आपका सामान बस मे ही रहेगा।
2TH DAY : प्रातः काल (8:35) बजे तक उज्जैन रेल्वे स्टेशन पहुँचने की संभावना है । बस रेल्वे स्टेशन के बाहर गेट नं. 8 के सामने खड़ी रहेगी । आप सभी यात्रीगण 8 नंबर गेट से ही निकलेंगे । कोई भी यात्री रेलपटरी क्राॅस नहीं करेंगे । गार्ड कोच की तरफ जाने के बाद प्लेटफार्म खत्म होते ही रास्ते बने हुए है । उसे क्राॅस करके स्टेशन से मैनेजर के साथ बाहर निकलेंगे, स्टेशन से बाहर नाश्ता की व्यवस्था बस में की गई है । समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों में बैठकर आप ओंकारेश्वर दर्शन के लिये प्रस्थान करेंगे। ओंकारेश्वर पहुँचने के पश्चात् नर्मदा नदी में स्नान करेंगे । (श्री ओंकारेश्वर ज्योतिलिंग 12 ज्योतिलिंग में से एक ज्योतिर्लिंग है दोपहर का भोजन भक्तजन स्वयं के व्यय से तथा अपनी सुविधानुसार करेंगे । आप दर्शन करने के पश्चात् (5.00) बजे तक जहा बस आपको छोड़ी थी,वही वापस आएंगे । जहाँ हमारी बस डेम पार्किंग में खड़ी रहेगी । ततपश्चात् हमारी बस (06.00) बजे उज्जैन के मनोरमा गार्डन लाॅज के लिये प्रस्थान करेगी। रात्रि भोजन उज्जैन के मनोरमा गार्डन लाॅज में की गयी है। आप सभी भक्तजनो से निवेदन है कि आप (10.00) बजे तक आकर अपना भोजन कर लेवे अन्यथा यह कार्यक्रम केवल (11.00) बजे तक ही रहेगा, उसके बाद समिति यात्रियों को भोजन कराने के लिए जिम्मेदार नही रहेगी। आप भोजन करने के बाद रात्रि विश्राम मनोरमा गार्डन लाॅज में करेंगे । नोट:- आप अपने कोच प्रभारी से संपर्क करने के पश्चात् ही स्टेशन से बाहर निकलेंगे यदि आप स्वयं की मर्जी से स्टेशन से बाहर निकलते है और आपको बस खोजने में परेशानी होती है तो इसके लिए आप स्वय जवाबदार रहेंगे । ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग:- ओम्कारेश्वर एक ज्योतिर्लिंग है यह मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है । यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्धवीय पर स्थित है। यह भगवान शिव के बाहर ज्योतिर्लिंग में से एक है । यहा के मोरटक्का गांव से लगभग 12 मील 20 कि.मी दूर बसा है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग द्धवीय हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है ।
3TH DAY : समस्त भक्तजन प्रातः उठने के पश्चात् नित्य कर्म तथा स्नान आदि से निवृत्त होकर चाय व नाश्ता आप उसी जगह से करेगें जहां आपने रात्रि भोजन किये थे। जो भक्तजन सुबह बिना नाश्ता किए मंदिर दर्शन को जाते है। वे भक्तजन सुबह 9 से 10 बजे तक मनोरमा गार्डन लॉज आपना नाश्ता कर लेवें। इसके पश्चात् नाश्ता नही मिल पाता है। उसके जवाबदारी आपकी स्वयं की होगी। इसके पश्चात् श्री महाकालेष्वर के दर्शन के लिये आप स्वयं के व्यय से जायेगें। (श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है।) दर्शन करने के पश्चात् भक्तजन अपनी सुविधानुसार तथा स्वयं के व्यय पर उज्जैन दर्शन/भ्रमण करेगें। दोपहर का भोजन भक्तजन स्वयं के व्यय से सुविधानुसार करेगें तथा मंदिर दर्शन के पश्चात् समस्त भक्तजन पुनः सायं (07ः00) बजे तक मनोरमा गार्डन लॉज पहुंचकर रात्रि स्वादिष्ट भोजन करेंगे। आपको कल के लिये एक बोतल पानी दिया जावेगा। जिसे आप नाश्ता के खाने में प्रयोग करेगें। मनोरमा गार्डन लॉज में अपने कोच प्रभारी से एक बोतल पानी ले लेंगें, यदि कोई भक्तजन इससे वंचित रह जाते हैं। तो उसके जवाबदार आप स्वयं रहेगें। बाद में फिर से पानी का बोतल उपलब्ध नहीं हो पाएगा। तत्पश्चात् समिति के व्यवस्थित वाहनों से रात्रि (09.00) बजे तक हम उज्जैन रेल्वे स्टेशन पहुचेगें। यदि आप अपनी व्यवस्था से आना चाहे तो रात्रि (10ः30) तक उज्जैन रेल्वे स्टेशन पहुंच सकते है। किसी कारणवश आप अपनी ट्रेन छोड़ देते हैं तो इसके जवाबदार आप स्वयं होगें। ट्रेन रात्रि (23.55) ट्रेन नं 11466 JBP SOMNATH EXP.- उज्जैन रेल्वे स्टेशन से विरावल के लिये प्रस्थान करेंगी। समस्त भक्तजन रात्रि विश्राम ट्रेन में करेगें। नोट:- यदि कोई भक्तजन ट्रेन मे मदिरा(दारू) प्रसाद के रूप में भैरो बाबा द्वारा चढाया हुआ मदिरा ले जाते हुए रेल्वे पुलिस बल द्वारा पकडे जाते है तो उसके जवाबदार आप स्वयं होंगे गुजरात में मदिरा (दारू) पर बैन है । पकडे़ हुए पाये जाने पर भक्तजन का जमानत भी नहीं मिल पायेगी। वहां कम से कम 6 महिने की जेल होगी। आप सभी भक्तजनों से निवेदन है कि मदिरा (दारू) अपने साथ ना रखें। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग:- महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है । यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है । पुराणों महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं मे मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू भव्य और दक्षिणुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है । इसके महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रसंसा की है । नोट:- कोई भी भक्तजन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती देखना चाहते हैं तो उनको भस्म आरती की बुकिंग यात्रा दिवस के 30 दिन पहले करानी होती है बुकिंग की अधिक जानकारी के लिए एवं बुकिंग करने के लिए इस लिंक htpp://dic.mp.nic.in/ujjain/mahakal/default.aspx पर लाॅग इन कीजियें।
4TH DAY : समस्त भक्तजन प्रातः (08:15) बजे अहमदाबाद में नाश्ता व चाय की व्यवस्था रहेगी । ततपश्चात् समिति द्वारा मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था राजकोट रेल्वे स्टेशन पहुँचने के पश्चात की गई है। सायंकाल (05:55) बजे (17:55) विरावल रेल्वे स्टेशन पहुँचने की संभावना रहेगी । तत्पश्चात् सभी भक्तजन समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों से सोमनाथ होटल को जायेंगे । होटल में ही रात्रि भोजन की व्यवस्था भी की गई है । यदि आप रात्रि में भी सोमनाथ जी के दर्शन करना चाहते है तो आप स्वयं के व्यय से रात्रि (22:00) (10:00) बजे तक मंदिर जा सकते है । समस्त भक्तजन भोजन करने के पश्चात् रात्रि विश्राम होटल में करेंगे|
5TH DAY : को समस्त भक्तजन नित्यकर्म स्नान आदि से निवृत्त हो कर सुबह (08.00) बजे आप नाश्ता इसी जगह से करेंगे जहां आपने रात्रि भोजन की थी। यह कार्यक्रम (09.30) बजे तक ही रहेगा। श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिग 12 ज्योतिर्लिग में से एक ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना चंद्रदेव ने किया था। चंद्रदेव का एक नाम सोम है। इसलिए इस ज्योंतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा। दोपहर भोजन की व्यवस्था भक्तजन अपनी सुविधानुसार स्वयं के व्यय से करेंगे। पूरे दिन श्री सोमनाथ दर्शन भ्रमण समुंद्र भ्रमण तथा अन्य मंदिरों के दर्शन कर शाम (07.00) बजे तक होटल पहुंचेंगे। रात्रि भोजन की व्यवस्था होटल पर की गई है। ततपश्चात् समिति द्वारा व्यवस्थित वाहन से विरावल रेल्वे स्टेशन के लिए प्रस्थान करेंगे। जंहा हमारी ट्रेन न. 19251 SMNH OKHA EXP (23.05) बजे विरावल से द्वारिका के लिए प्रस्थान करेगी। तत्पष्चात् रात्रि विश्राम ट्रेन में रहेगी। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग:- शिवपुराण के अनुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग है । यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित है । ऐसी मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्र देव ने जब प्रजापति दक्ष ने अपनी सभी सत्ताइस पुत्रिया का विवाह चंद्रमा के साथ कर दिया तो वे बहुत प्रसन्न हुए ,पत्नी के रूप में दक्ष कन्याओं को प्राप्तकर चंद्रमा बहुत ही शोभित हुए और दक्षकन्यायो भी अपने स्वामी के रूप में चंद्रमा को प्राप्त कर शोभायाम हो उठी चंद्रमा की उन सत्ताइस पत्नियो में रोहिणी उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय थी जिसको वे आदर तथा प्रेम करते थे उनका इतना प्रेम अन्य पत्नियों से नही था। चंद्रमा की अपनी तरफ उदासीनता और उपेक्षा का देखकर रोहिणी के अलावा बाकी दक्ष पुत्रियां बहुत दुखी हुई । वे सभी अपने पिता दक्ष की शरण में गई और उसने अपने कष्टों का वर्णन किया|
6TH DAY : समस्त भक्तजन प्रातः (7:03) बजे द्वारिका पहुँचने के पश्चात् समस्त भक्तजन नित्यकर्म (FRESH) आदि से निवृत्त ट्रेन पे ही हो जायेगे। समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों से शिवम् लॉज़ पहुंचेगें। पहुँचने के पश्चात् आप अपना समान रूम में रख कर अपनी सुविधानुसार गोमती नदी में स्नान व द्वारिकाधीश के दर्शन करने जायेगे । नाश्ते की व्यवस्था आपकी स्वयं की रहेगी। तत्पश्चात (12.00) बजे तक वापस शिवम् लाॅजआएंगे जहाँ दोपहर की खाने की व्यवस्था रहेगी । समस्त भक्तजन समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों से रूकमणी मंदिर, श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग, गोपी तालाब द्वारिकाभेट के दर्शन के लिए लिये दोपहर (02.00) बजे शिवम् लाॅज के सामने से प्रस्थान करेगें। श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग में आप सभी भक्तजनो के दर्शन के लिए 1 घंटे ही दिया जायेगा क्योकि द्वारिकाभेट में (06:00) बजे के बाद बोट का आना जाना बंद कर दिया जाता है तत्पश्चात हम द्वारिकाभेंट के लिए प्रस्थान करेंगे | द्वारिकाभेट में बोट के द्वारा 20 रू जाने व 20 रू आने का व्यय भक्तजन स्वयं वहन करेगें। रात्रि भोजन की व्यवस्था शिवम् लाॅज में रखा गया है। भोजन करने के पश्चात् समस्त भक्तजन रात्रि विश्राम शिवम् लॉज़ में करेंगे । द्धारिका:- द्धारिका एक पौराणिक शहर है यह भारत के पश्चिम तट पर अरबसागर के किनारे पर गुजरात जिला जामनगर में बसी हुई है यह कृष्ण का निवास स्थान था। द्धारिका नाम, संस्कृत भाषा के शब्द सार से लिया गया है। यह भारत के सात प्राचीन शहरो में से एक है जो कि द्वारिकाधीश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है । द्धारिका मे श्रीकृष्ण ने अपने राज्य पर शासन किया था। इसलिए यह हिन्दुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान मे से एक है। श्रीकृष्ण की सत्ता रूढ़ जगह के अलावा द्धारिका वह जगह है जहां भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक राक्षस को मार डाला। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग :- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह द्वारिका, गुजरात के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग शिव जी के बाहर ज्योतिर्लिग में से एक है । हिन्दू धर्म के अनुसार नागेश्वर अर्थात् नागो का ईश्वर होता है । यह विश आदि से बचाव का सांकेतिक भी है। रूद्र संहिता में इन भगवान को दारुकवामे नागेश कहा गया है। भगवान शिव का यह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रान्त के द्धारिकापुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर स्थित है । इस पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन की शास्त्रों में बड़ी महिमा बताई गई है। कहा गया है कि जो श्रद्धापूर्वक इसकी उत्पत्ति और महात्मक की कथा सुनेगा वह सारे पापो से छुटकारा पाकर समस्त सुखो का भोग करता हुआ अंत में भगवान शिव के परम पवित्र दिव्य धाम को प्राप्त होगा।
7TH DAY : प्रातःकाल समस्त भक्तजन नित्यकर्म व स्नान आदि से निवृत्त होकर समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों से प्रातः (06.00) बजे हम द्वारिका रेल्वे स्टेशन के लिए प्रस्थान करेंगे। आपको दो पानी बोतल दिया जावेगा, जिसे आपको दोपहर भोजन रात्रि भोजन में प्रयोग करना रहेगा। ट्रेन प्रातः (09.13) बजे द्वारिका ट्रेन नं. 16734 RAMESHWARM EXP. अहमदाबाद के लिए प्रस्थान करेगी। दोपहर भोजन राजकोट व रात्रि भोजन अहमदाबाद पहुँचने के पश्चात व्यवस्था कराई गई है । तत्पश्चात अहमदाबाद से ट्रेन नं.22689 ADI YPR SUP FAST (19:00) बजे कोपरगांव के लिए प्रस्थान करेंगे। रात्रि विश्राम ट्रेन पर रहेगी ।
8 TH DAY : कोपरगाँव – सुबह. (07:50) मिनट मे पहुँचने के पश्चात् सभी यात्री व्यवस्थित बस में दिए हुए सीट नंबर पर ही बैठेंगे व व्यवस्थित वाहनों से शिरडी सांई संस्थान धर्मशाला फेस-2 के लिए प्रस्थान करेंगे वहा नहाने व नाश्ते की व्यवस्था की गई है तत्पश्चात् वहां से घृष्णेश्वर दर्शन के लिए सभी यात्री समिति द्वारा व्यवस्थित बस में एवं दिये हुए सीट नंबर पर ही बैठेंगे एवं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिये प्रस्थान करेंगे । घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के पश्चात् समिति द्वारा व्यवस्थित वाहन से शनि सिंघनापुर दर्शन करते हुए हम शिरडी साई संस्थान धर्मशाला फेस- 2 पहुचंगे। साई संस्थान पहुँचने । के पश्चात् रात्रि भोजन की व्यवस्था की गई है । भक्तजन भोजन करने के पश्चात् रात्रि विश्राम (हालः- हाल 18 बेड का होता है ) में 18 यात्रियों के सोने की व्यवस्था की गई है। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग:- महाराष्ट्र मे औरांगाबाद के नजदीक दौलताबाद से 11 किलोमीटर दूर घृष्णेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है । यह बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है । कुछ लोग इसे ’घुमेश्वर’ के नाम से भी पुकारते है । बौध्द भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिध्द गुफाए इस मंदिर के समीप ही स्थित है । इस मंदिर का निर्माण देवी अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था। शहर से दूर स्थित यह मंदिर सादगी से परिपूर्ण है । द्वादश ज्योतिर्लिंगों में यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है । इसे ’घुमेश्वर’ या घृष्णेश्वर’ भी कहा जाता है । यह महाराष्ट्र प्रदेश में दौलताबाद से 12 मीटर दूर वेरूलगांव के पास स्थित है। शनि सिंघनापुर:- श्री शैनेश्वर व की ख्याति सूर्यपुत्र शनिदेव के कारण शनि सिंघनापुर गांव में कभी चोरी नहीं होती तथा किसी भी मकान में खिडकी, दरवाजा अथवा ताला लगाया नही जाता है । गांववालों की मान्यता है कि अगर कोई चोरी करता है तो वह अंधा बन जाता है । चोरी कभी गांव की हद पार नही कर सकता।
9 TH DAY : प्रातः काल समस्त भक्तजन नित्यकर्म तथा स्नान आदि से निवृत्त होकर नाश्ता आप उसी जगह से करेंगे जहाँ से आपने रात्रि भोजन की थी। सुबह (7.00) बजे नाश्ता का प्रबंध किया गया है। यह कार्यक्रम (08.00) बजे तक ही रहेगा। जो भक्तजन किसी कारणवश इस समय तक नाश्ता नहीं कर पाएंगे , समिति इसके लिये जवाबदेह नही रहेगी, प्रातः (08.30) बजे श्री भीमाशंकर ज्योतिलिंग के लिए प्रस्थान करेंगे । यदि आप भीमाशंकर दर्शन के लिए निकलने में लेट करेंगे तो आपको रात्रि भोजन के लिए लेट हो सकता है । उसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार रहेंगे व रात्रि भोजन आपको किसी भी ढ़ाबे में खाना पड़ेगा, वह आपकी स्वयं की व्यय पर रहेगी| भीमाशंकर पहुँचने के बाद दर्शन कर पुनः बस में बैठकर हम वापसी साई संस्थान के लिए रवाना होंगे जहाँ हमारी रात्रि भोजन की व्यवस्था रहेगी । नोटः- 1 .भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन की वी आई पी पास मंदिर प्रंगण के पास से मिलती है। जिन भक्तजनों को वी आई पी पास से दर्शन करना चाहते है वे वहंा से ले सकते है। जिसकी राषि लगभग 200 से 400 रू. है। 2. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन लिए आपको बस जंहा पर छोड़ती है। वहंा से आपको दूसरे बस में से स्वयं के व्यय से जाना रहेगा। प्रति व्यक्ति जाने का 10 रू और आने का 10 रू लगता है । भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग:- भीमाशंकर मंदिर भोरगिरि गांव खेड से 50 कि.मी. पश्चिम पुणे से 110 कि.मी.में स्थित है । यह पश्चिमी घाट के सयाद्रि पर्वत पर स्थित है । यही से भीमानदी भी निकलती है। यह दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है । यहाँ भगवान शिव का प्रसिध्द ज्योतिर्लिंग है। भीमाशंकर महादेव काशीपुर में भगवान शिव का प्रसिध्द मंदिर और तीर्थ स्थान है । यहाँ का शिवलिंग काफी मोटा है, जिसके कारण इन्हें ’मोटेश्वर महादेव’ भी कहा जाता है । पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है|
10TH DAY : प्रातःकाल (05:00) बजे समस्त भक्तजन नित्यकर्म तथा स्नान आदि से निवृत्त होकर श्री सांई बाबा के दर्शन हेतु अपनी सुविधानुसार प्रस्थान करेंगे । सुबह (8.00) बजे नाश्ता का प्रबंध किया गया हैं । यह कार्यक्रम (09.00) बजे तक ही रहेगा । प्रातः(9.30) बजे श्री त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु प्रस्थान करेंगे। समस्त भक्तजन श्री त्रयम्बकेश्वर ज्योतिलिंग के दर्शन के पश्चात् अपनी सुविधानुसार तथा स्वयं के व्यय से मध्यान्ह भोजन करेंगे। रात्रि भोजन की व्यवस्था पंचवटी रेस्टोरेंट में रखी गई है । रात्रि (11.00) बजे (23.00 बजे) तक समस्त भक्तजन समिति द्वारा व्यवस्थित वाहनों से नासिक रेल्वे स्टेशन पहुचंगे । आपको दो पानी बोतल दिया जावेगा, जिसे आपको दोपहर भोजन रात्रि भोजन में प्रयोग करना रहेगा। नोट- 1. श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन की वी आई पी पास मंदिर प्रंगण के पास से मिलती है। जिन भक्तजनों को वी आई पी पास से दर्शन करना चाहते है वे वंहा से ले सकते है। जिसकी राशि लगभग 200रू. है। 2. समिति की बस आपको जिस जगह पर छोड़ती है, मंदिर दर्शन करने के पष्चात् आपको उसी जगह वापस आना है। साई बाबा:- श्री साईं बाबा ईश्वर के सगुण अवतार है तथा शिरडी के संत है जिन्होंने 60 वर्ष तक द्वारिका माई (मस्जिद) में अपना जीवन व्यतीत किया। आज उनका पार्थिव शरीर समाधी मंदिर मे है जो साईं बाबा मंदिर के नाम से जाना जाता है | साई शब्द उन्हें पश्चिम में स्थित प्रांत महाराष्ट्र के शिरडी नामक कस्बे में पहुँचने के बाद मिला था। उनका आदर्श वाक्य था ’’सबका मालिक एक’’ । त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग:- त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र प्रान्त के नासिक जिले में है । यहाँ के निकटवर्त ब्रम्हगिरी नामक पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम है ।इन्ही पुण्यतोया गोदावरी के उद्गम भगवान की भी बडी महिमा है। गौतम ऋषि तथा गोदावरी के प्रार्थनानुसार भगवान शिव इस स्थान में वास करने की कृपा की त्रयम्बकेश्वर नाम से विख्यात हुये। मंदिर के अंदर एक छोटे से गड़े में तीन छोटे-छोटे लिंग हैं , ब्रम्हा विष्णु और शिव इन तीनो देवो के प्रतीक माने जाते हैं । शिवपुराण के ब्रम्हगिरी पर्वत के ऊपर जाने के लिये चौड़ी-चौड़ी सात सौ सीढियाॅ बनी हुई है। इन सीढियों पर चढ़ने के बाद “रामकुंड” और “लक्ष्मणकुंड” मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुँचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते है।
11TH DAY : तत्पश्चात् ट्रेन नम्बर 18029 LTT SHALIMAR EXP से (01:30) बजे नासिक से छत्तीसगढ़ के प्रस्थान करेंगे । डोंगरगढ़ (17.15), राजनंदगाव (17.39), दुर्ग (18.30), रायपुर (19.40), भाटापारा (20.43), बिलासपुर (21.50), बजे रेल्वे स्टेशन पहुँचने की सम्भावना है।
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हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर (मालवा में), परल्यां वैद्यनाथं च नामक स्थान श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर।[क] हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम का पाठ करता है, उसके सभी प्रकार के पाप छूट जाते हैं और उसको संपूर्ण सिद्धियों का फल प्राप्त हो जाता है। प्रत्येक ज्योतिर्लिङ्ग का एक-एक उपलिंग भी है जिनका विवरण शिवमहापुराण की ‘ज्ञानसंहिता’ के 38वें एवं ‘कोटिरुद्रसंहिता’ के प्रथम अध्याय में प्राप्त होता है।